🙏Jagannath Swami Nayana Patha Gami Bhaba Tume🙏
एक हिंदू अपने जीवन में एक बार चार धामों की यात्रा करना चाहता है । ओह चार धाम भारत में हैं जो हिंदुओं के लिए सबसे पवित्र माना गया हैं और जगन्नाथ पुरी उनमें से एक है। पूरी में भगबान कृष्णा जो जगन्नाथ के रूप में हैं और उनके साथ बड़े भाई बलराम और बेहेन सुभद्रा बिराजते हैं।तीनों ही देव प्रतिमाएं निम् की काष्ठ की बनी होई है। पूरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर को श्री मंदिर कहा जाता हैं जो ओडिशा के पूरी जिले में है। भगवान जगन्नाथ के श्री मंदिर की ऊंचाई 214 फीट (65 मीटर) है और 800 वर्ष से अधिक प्राचीन है।
यहां हर साल होने वाले रथ यात्रा विश्व प्रसिद्ध हैं जो हिन्दू पंचांग के अनुसार हर साल आषाढ़ महीने की द्वितीया,शुक्ल पक्ष के दिन होता है। प्रभु जगन्नाथ की रथयात्रा का वर्णन स्कंद पुराण में भी है । इस यात्रा के दिन भगबान जगन्नाथ,बलभद्र और बेहेन सुभद्रा आपने आपने रथ में आपने मौसी के घर (गुंडिचा मंदिर ) 7दिन के लिए जाते है। सात दिनों के प्रवास के बाद, जगन्नाथ,बलभद्र और बेहेन सुभद्रा अपने श्री मंदिर को लौट आते है।
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रथ का नाम |
नंदिघोष |
तालध्वज |
दर्प दलन |
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पहियों की संख्या |
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उपयोग किए गए लकड़ी के टुकड़ों की कुल संख्या |
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ऊंचाई |
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लंबाई और चौड़ाई |
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इस्तेमाल होने वाले कपड़े का रंग |
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लाल, नीला हरा |
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ध्वज का नाम |
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घोड़ों की संख्या और रंग |
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रथ की रस्सी का नाम |
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जगन्नाथ रथ यात्रा का महत्व
भगवान जगन्नाथ के इस पावन यात्रा में भाग लेने के लिए सारे दुनिया से भक्तों का जमावड़ा लगता है। खास करके रथों के ऊपर भगवान को देखने केलिए , कियोंकि माना जाता है की रथ के ऊपर भगबान जगन्नाथ की दर्शन से बहत पुर्ण्य मिलने के साथ साथ रथ खींचने वाले को मोक्ष की प्राप्ति होती है और केवल इन्शान नहीं स्वर्ग से देवतां भी आतें है भगवान जगन्नाथ के इस पबित्र यात्रा का दर्शन करने के लिए क्योंकि भगवान जगन्नाथ खुद अपने भक्तों के बीच आते हैं और उनके दु:ख-सु:ख में सहभागी होते हैं और इसका महत्व शास्त्रों और पुराणों में भी बताया गया है।
बहुड़ा यात्रा का वर्णन
विशाल, रंग-बिरंगे सुसर्जित रथों को , गुंडिचा मंदिर के लिए भक्तोंने बड़े भक्ति भावो से खिचींते हैं। श्री मंदिर से मौसी माँ (गुंडिचा मंदिर ) का दुरी 3km है। गुंडीचा मंदिर में भगवान जगन्नाथ के दर्शन को ‘आड़प-दर्शन’ कहा जाता है।आषाढ़ माह के दसवें दिन भगबान जगन्नाथ,बलभद्र और बेहेन सुभद्रा पुन: श्री मंदिर की ओर प्रस्थान करते हैं। रथों की वापसी की इस यात्रा को बहुड़ा यात्रा कहते हैं।अगले दिन भगवान भक्तों को अपने सोना भेस का दर्शन देकर श्री मंदिर को प्रबेश करते हैं।


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