हम सब जानते है की भारत अपने कला और संस्कृति के लिए सारा दुनिया में प्रसिद्ध है । आज नहीं युग युग से भारत ने उसकी कला और संस्कृति को अपने सीने में समेट कर रखा है । कितने मंद बृद्धि के लोक भारत में आकर उसकी कला,धर्म और संस्कृति को मिटाने को कोशिस किये लेकिन हम भारतीयों ने अपने कला और संस्कृति को जीबित रखने के लिए हजारों सालों से संघर्ष करते आ रहे हैं। वैसे ही हमारे धर्म,कला और संस्कृति से जुड़ी हर चीज हमारे धरोहर है जिसके बिना हम भारतीय अधूरे हैं। आज वैसे ही हम एक भारत की प्रसिद्ध धरोहर के बारें में बात करने वाले हैं जो कोणार्क सूर्य मंदिर(Black Pagoda) के नाम से सारे दुनिया में प्रसिद्ध है।
कोणार्क मंदिर कहां है
कोणार्क का सूर्य मंदिर ओडिशा राज्य के पुरी शहर से लगभग 36 km और ओडिशा की राजधानी भुबनेश्वर से लगभग 67 km दूर, चंद्रभागा में समुन्दर की तट पर स्थित है। दिन था कोणार्क का मंदिर समुन्दर की बिच बनाया गया था परन्तु अभी समुन्दर धीरे धीरे पीछे चला गाया है ।
कोणार्क का सूर्य मंदिर किसने बनवाया
हिंदू धर्म के वेदों में सूर्य की पूजा के बारे में बताया गया है। उनकी उपासना से स्वास्थ्य,ज्ञान, सुख,पद,सफलता,प्रसिद्धि आदि की प्राप्ति होतें है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान कृष्ण के पुत्र साम्ब को उनके श्राप से कोष्ठ रोग हो गया था और साम्ब ने कोणार्क में 12 वर्षों तक चंद्रभागा की समुन्दर की तट से भगवान सूर्य देव को तपस्या करके कोष्ठ रोग से मुक्त होए थे। उसके बाद 13 वीं शताब्दी में कलिंग(आज का ओडिशा ) में गंग वंश के शासक लांगूला नृसिंहदेव जो भगवान सूर्य देव के बहत बड़े उपासक थे उनके आदेश पर 1243-1255 ईसवी के बीच करीब 1200 मजदूरों की सहायता से करीब 12 साल में इतने भब्य मंदिर को बनाया गया था और यह भगवान सूर्य देव को समर्पित था।
सूर्य मंदिर के बारे में क्या खास है?
कोणार्क का सूर्य मंदिर को कलिंग के वास्तुकला एक श्रेष्ठ उपलब्धि मन जाता है। यह मंदिर का निर्माण लाल रंग के बलुआ पत्थरों और काले ग्रेनाइट के पत्थरों से हुआ है। इस मंदिर को सूर्य देव के विशाल रथ के आकर का रचना किया गया था जिस में करीब 12 जोड़े(24 nos ) विशाल पहिए लगे हुए हैं,जिसे करीब 7 ताकतवर घोड़े खीचतें प्रतीत होते हैं।जो साल का 12 महीने ,हप्ते के 7 दिन और दिन का 24 घंटो को और इसके साथ ही इनमें लगीं 8 ताड़ियां दिन के आठों प्रहर को दर्शाती हैं।यंहा भगवान सूर्य देव की बाल्यावस्था, युवावस्था और वृद्धावस्था में बनी तीन-अलग-अलग मूर्तियां भी बनी हुईं हैं, जिन्हें उदित सूर्य, मध्यांह सूर्य और अस्त सूर्य भी कहा जाता है। इश्के साथ नाटमंडप , मुख्य द्वार ,जगमोहन, गर्व गृह अदि बनाया गया था। इस मंदिर के हर हिसे में बनाया गया कला कृति में पुरातन युग से लेकर आजकल के ज़माने के वारे उल्लेख मिलता है।
कोणार्क सूर्य मंदिर अपनी अद्भुत कलाकृति औऱ भव्यता की वजह से भारत के 7 आश्चर्यों में शामिल किया गया है और 1984 में यूनेस्को (UNESCO) की वर्ल्ड हेरिटेज साइट में भी शामिल किया गया है।
कोणार्क मंदिर को कैसे नष्ट किया गया था?
विदेशी हमलों और अन्य कई कारणों जैसे अंग्रेजों के समय में बिना देख वाल,समुंदरी तूफान की वजह से कोणार्क सूर्य मंदिर का अधिकांश हिस्सा धोस्तः हो गया। कोणार्क सूर्य मंदिर पर 15वीं शताब्दी में मुस्लिम और यवन सेना ने आक्रमण करक मंदिर के अधिकांश हिस्सों को नष्ट कर दिया। इस सब के कारण सूर्य मंदिर के बास्तुकला को बहता हानि होआ लेकिन कोणार्क का सूर्य मंदिर आज भी खुद को हजारों साल से दुनिया के सामने अपने भब्यता और कलिंग के कलाकृति को दर्शाते आ रहा है।
बनने जाहा रहा है द्वितीय कोणार्क
पूर्व राज्य सभा संसद रघुनाथ महापात्र जो ओडिशा तथा भारत के महान पत्थर के कलाकार और वास्तुकार थे जिन्होने ओडिशा में और एक कोणार्क मंदिर बनाने के सपना देखे थे । क्योंकि वो कलिंग के कला और पत्थर के करू कार्य के महारथ हासिल किए थे। जिसके लिए उनके पत्थर उद्योग के लिए 18 साल में 23 साल की उम्र में भारत सरकार द्वारा पद्म श्री तथा पद्मभूषण, पद्म विभूषण,भरतमुनि पुरस्कार आदि बहत सरे सम्मानों से सम्मानित किया गया था। वह भुवनेश्वर में "शिल्पी ग्राम" और "रघुनाथ शिल्प" जैसे संस्था बनाकर बहत सारे लोगों को ओडिशा के कला और प्राचीन युग के वास्तुकार के ज्ञान देते थे । उन्होंने पूरे भारत में कई प्रमुख मंदिरों का निर्माण कराया और उनकी बनाई गई भारतीय संसद में 5 फुट ऊंची सूर्य नारायण की प्रतिमा स्थापित की गई है,राजीव गांधी की समाधि,नई दिल्ली में अशोक होटल में 18 फुट लंबा कोणार्क पहिया, ओडिशा की धौली में 2 बौद्ध मूर्तियाँ,लद्दाख में 20 फीट ऊंची तीन बौद्ध मूर्तियां,फ्रांस में एक विशाल बौद्ध लकड़ी की मूर्ति,जापान में एक 15 फुट लंबा अशोक स्तंभ उनके महान ज्ञान तथा कलिंग(आज के ओडिशा) का कला और कारीगरों की महानता को दर्शाता है।



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