पंचलिंगेश्वर शिव मंदिर ओडिशा के बालेश्वर जिले में नीलगिरी के पास पंचलिंगेश्वर में एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित है।पंचलिंगेश्वर मंदिर एक भगवान शिव का मंदिर है जिसका नाम भगवान शिव के पांच लिंगों के नाम पर रखा गया है । पंचलिंगेश्वर नाम का अर्थ है पांच शिव लिंग। 'पंच' अर्थात पांच और 'लिंगेश्वर' अर्थात भगवान शिव। पंचलिंगेश्वर मंदिर में महत्वपूर्ण चीजें पांच शिव लिंग हैं । पहाड़ी की चोटी पर स्थित पंचलिंगेश्वर मंदिर तक पहुंचने के लिए 263 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं।एक बारहमासी झरना की धारा, जो इस क्षेत्र का मुख्य आकर्षण है,नियमित रूप से 5 शिवलिंगों का अभिषेक करती है क्योंकि यह उनके ऊपर बहती है इस कारण से यंहा स्थित पांचों शिव लिंग को आंखों में देखना मुश्किल है। मंदिर तक पहुंचने के बाद जलधारा के अंदर लिंगों को छूने और पूजा करने के लिए धारा के समानांतर चट्टान पर सामान्य लेटना पड़ता है। आप अपने हातों में स्पर्श करके भगवान शिव के 5 लिंग रूपी अबतर का अनूभब कर सकते हैं। पूरे क्षेत्र में, मंदिर भक्तों के दिलों में एक अलौकिक महत्व रखता है जो इसे जिले के सबसे प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक बनाता है।
केवल भक्तों के लिए ही नहीं, प्रकृति प्रेमियों के लिए भी यह स्थान एक बेहतरीन दर्शनीय स्थल है।क्यों की पंचलिंगेश्वर पहाड़ की पूर्व की ओर नीलगिरि पहाड़ और पश्चिम की ओर मंगलपुर पहाड़ स्थित है जो इस श्रेत्र को हराभरा करने के साथ साथ प्राकृतिक रूप से पूर्ण करता हैं , इसलिए यह स्थान आने वाले लोगों को आनंदित करने के लिए एक वास्तविक परिवेश बनाता है।इस श्रेत्र को आप अपने पिकनिक स्पॉट के रूप में भी चयन कर सकते हैं। अगर आपको ट्रेकिंग का शौक है तो आप नीलगिरी हिल्स पर ट्रेकिंग कर सकते हैं।
पंचलिंगेश्वर का इतिहास - Panchalingeswar Temple History
हिन्दू पुराणों के अनुसार,द्वापर युग में बाणासुर नामक एक असुर था जो असुरराज बलि के सौ पुत्रों में सबसे ज्येष्ठ पुत्र था । बाणासुर भगवान शिव के बहत बड़े भक्त भी था। उन्होने भगवान शिव से शंकरपुत्र बनने की इच्छा के साथ साथ सहस्रबाहु पाने के लिए घोर तपस्या की। उसके तपस्या में प्रसन्न होकर शिव ने उसे शिव पुत्र होने के साथ साथ सहस्रा भुजा का भी बरदान दे दिया। इतना बड़ा बरदान मिलने के वाद बाणासुर तीनो लोक में अपना उत्पात शुरू कर दिया, फिर एक बार अपनी बेटी उषा और श्री कृष्ण पुत्र प्रद्युम्न के बेटे अनिरुद्ध की प्रेम विवाह के लिए भगवान श्री कृष्ण और बाणासुर के बीच भीषण युद्ध हुआ।भगवान श्री कृष्ण ने बाणासुर के अहंकार को चूर करने के निमित्त अपने सुदर्शन से इसके हाथों में से चार को छोड़कर सारे भुजाओं को काट डालेथे। पंचलिंगेश्वर वही स्थान है जंहा बाणासुर अपने तपस्या के लिए भगवान शिव का स्थापन किए था। लोग कथा के अनुसार ऐसा माना जाता है कि भगवान श्री राम चंद्र, माता सीता और लक्ष्मण ने आहुति घाटी में अपने वनवास की अवधि के दौरान इस घाटी में 5 दिन बिताए थे और पौराणिक कथा के अनुसार अज्ञातबास के समय कौरवों से खुद को छुपाने के लिए पांडव इस घाटी में निवास करते थे।
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कैसे पहुंचें पंचलिंगेश्वर - How to reach Panchalingeswar
पंचलिंगेश्वर जाने केलिए आप सड़क मार्ग से बालेश्वर,श्वर,नीलगिरि अदि शहरों से बस,टैक्सी, कार के माध्यम से 30 मिनट में पहंच सकते हैं। पंचलिंगेश्वर के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन बालेश्वर और श्वर है जो ओडिशा के राजधानी भुबनेश्वर हवाई अड्डा से (200 किमी) बस और रेल के माध्यम पहंचा जा सकता है।



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